जम्मू कश्मीर प्रशासन ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए नई आबकारी नीति का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। इसमें स्पष्ट है कि अब शराब की दुकानों के लाइसेंस नीलामी के जरिये आवंटित किए जाएंगे। जो सबसे ऊंची बोली लगाएगा, आबकारी विभाग उसे ही दुकान का लाइसेंस जारी करेगा। ये लाइसेंस सिर्फ एक वर्ष के लिए ही जारी होंगे। ये रिन्यू नहीं होंगे, बल्कि फिर से इनकी बोली लगेगी।

इस ड्राफ्ट के सार्वजनिक होते ही पुराने शराब विक्रेताओं में खलबली मच गई है। जम्मू कश्मीर की नई आबकारी नीति को लेकर मंगलवार को दिन भर मची खलबली और दूसरे राज्यों के लोगों के यहां आकर लाइसेंस लेने की अफवाहों पर आबकारी विभाग ने देर शाम स्थिति स्पष्ट कर दी है। इसमें कहा गया कि नीलामी से केवल जम्मू कश्मीर के डोमिसाइल धारकों को ही शराब की दुकानों के लाइसेंस जारी किए जांएगे।

विभाग ने एक लिखित बयान जारी कर कहा है कि लाइसेंस केवल एक साल के लिए जारी होगा। दुकानों की संख्या उतनी ही रहेगी, जितनी मौजूदा समय में है। बड़े-बड़े ठेकेदारों द्वारा लाइसेंस लेने की अटकलों पर विभाग ने कहा है कि एक व्यक्ति को एक से अधिक दुकान का लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा। शराब कारोबार से जुड़े लोगों को उम्मीद थी कि शायद सरकार मौजूदा विक्रेताओं को कुछ छूट या प्राथमिकता देगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

आबकारी विभाग ने वित्तीय वर्ष 2021-22 की आबकारी नीति का ड्राफ्ट जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि अब शराब की दुकान के लिए जो सबसे बड़ी बोली लगाएगा, लाइसेंस उसे ही मिलेगा। मजेदार बात यह है कि विभाग ने सोमवार की देर रात इस ड्राफ्ट को अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया और आपत्तियां जमा करवाने के लिए सिर्फ मंगलवार का ही दिन दिया। आमतौर पर आपत्तियां दर्ज करवाने के लिए एक-दो सप्ताह दिए जाते हैं। इस बार जो तरीका अपनाया गया है, उससे साफ है कि विभाग अपनी नीति को हर हाल में लागू करने का मन बना चुका है।

आबकारी नीति का ड्राफ्ट सार्वजनिक होते ही मंगलवार को शराब की बिक्री करने वाले कारोबारियों में खलबली मच गई। दिन भर बैठकों का दौर चला। विक्रेताओं ने विभाग से आपत्तियां दर्ज करवाने के लिए अतिरिक्त समय दिए जाने की मांग भी रखी। हालांकि, इस पर विभाग ने कोई फैसला नहीं लिया है।