देर से ही सही लेकिन शिक्षा विभाग की नींद तो खुली। शिक्षा विभाग ने पिछले तेरह वर्षों से इंतजार कर रहे इंचार्ज अधिकारियों को रेगुलर करने का आदेश जारी किया है। रेगुलर किए गए अधिकारियों में प्रिंसिपल, सीनियर लेक्चरर और जेडइओ शामिल हैं जो पिछले लंबे समय से रेगुलर होने को इंतजार कर रहे थे। तेरह वर्षों के इंतजार के बाद रेगुलर हुए इन शिक्षकों में खुशी की लहर तो दौड़ पड़ी है लेकिन इनमें कुछ ऐसे भी हैं जो रेगुलर होने के इंतजार में सेवानिवृत भी हो चुके हैं जबकि कुछ इस दुनिया को भी छोड़ चुके हैं।
शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव बीके सिंह ने आदेश जारी कर 59 इंचार्ज प्रिंसिपलोें व सीनियर लेक्चररों को रेगुलर किया है जबकि 12 जेडइओ को भी रेगुलर किया है। आदेश के अनुसार रेगुलर किए गए इन शिक्षकों को हल्फनामा दायर करना होगा। अगर किसी शिक्षक की पीजी डिग्री सही नहीं पाई जाती तो उसे रेगुलर नहीं किया जाएगा। इसके बाद इन कर्मियों का वेतन तय होगा।
वहीं इन शिक्षकों को रेगुलर किए जाने पर उन शिक्षकों में भी आस बंधी है जो अभी इस सूची में शामिल होने से रह गए हैं। उन शिक्षकों को उम्मीद है कि विभाग जल्द ही उन बारे भी सोचेगा और उन्हें भी रेगुलर किया जाएगा। वहीं टीचर्स फोरम के संभागीय प्रधान कुलदीप सिंह बंदराल का कहना है कि यह शिक्षा विभाग का अच्छा कदम है। उम्मीद है कि आगे इंतजार कर रहे शिक्षकों को भी जल्द रेगुलर किया जाएगा।

नए इंचार्ज शिक्षकों का बंद हुआ चार्ज अलाउंस :

शिक्षा विभाग ने चाहे ही तेरह वर्ष से इंतजार कर रहे प्रिंसिपल, सीनियर लेक्चरर और जेडइओ को रेगुलर कर उनका मनोबल बढ़ाया है लेकिन वे शिक्षक अब परेशान हैं जिन्हें हाल ही में इंचार्ज बनाया गया है। पहले इंचार्ज बने प्रिंसिपल, सीनियर लेक्चरर या अन्य अधिकारियों को चार्ज अलाउंस मिलता था यानि जब तक उन्हें रेगुलर नहीं किया जाता था, तब तक उनको चार्ज अलाउंस में कुछ पैसा मिलता रहता था लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब पुराने वेतन पर ही इंचार्ज अधिकारी काम कर रहे हैं और उन्हें इतना भी पता नहीं कि कब तक उन्हें इंचार्ज ही रहना पड़ेगा। हालांकि रेगुलर किए जाने के बाद उस अवधि से वेतन बढ़ोतरी का लाभ जरूर मिलता है जिस अवधि में शिक्षक या अधिकारी को इंचार्ज जिम्मेदारी सौंपी जाती है। टीचर्स फोरम ने भी सरकार से अपील की है कि वे इंचार्ज शिक्षकों व अधिकारियों को चार्ज अलाउंस दें ताकि उनको कुछ लाभ हो।